खानाबदोश दिल

ख़ानाबदोश दिल
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ग़ुम हैं कई रोज़ से.....
वो धीमी धड़कनें
वो रिश्तों की तल्ख़ियाँ
टूटी इमारतें उम्मीद की
वादों के इम्तेहाँ
वो नापे हुए रास्ते
वो तन्हाँ सा कारवाँ

है बहुत कुछ पास है जबसे …

ज़िंदा रहने की इक ज़िद
और दिल की ख़ानाबदोशियाँ
बेपनाह सी उम्मीदें और
मोहब्बत की सरगोशियाँ

#दिल_मुन्तज़िर_सा

NeeRaj K. Gupta

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