मैं जो हूँ

【मैं जो हूँ】
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जिंदगी का पथ मिला, चलने लगा हूँ
साँसों से धड़कन मिली, जीने लगा हूँ
वेदनाओं की लहरों का प्रवाह मद्धिम है
नैराश्य का धुंधलका भी अब छंट चुका है,
पिघले अहसास दिल को नम ही रखते हैं

क्या भरोसा, कल रहूँ मैं या कि न रहूँ
जिंदगी की ये कहानी मैं भला किससे कहूँ
कौन समझेगा ये अहसासों की जुबां, कोई नहीं
इसलिए सोचता हूँ कि खामोशी ही बेहतर है

वह संघर्ष जो मेरा अपने आप ही से था
जिस घुटन के दौर को मैंने है झेला
यूँ तो कहने को सभी थे  साथ मेरे
फिर भी कितनों के बीच में था अकेला

कई बार तो जिंदगी में यूं भी हुआ है
मंजिलों तक पहुंचकर है नाव डूबी
इरादों के फौलाद ने मुझको तपाया
आज जो हूँ हौसलों ने है बनाया

शुक्रिया उनका जो कल थे साथ मेरे
शुक्रिया उनका जो अब भी साथ में हैं
इल्तिज़ा ये है कि जब भी हो अंधेरा
बिखरने से पहले मेरा साथ देना
हो सके तो बस ये याराना निभाना...

NeeRaj K. Gupta

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